$TRUMP KA ELAN BARSEGA DOLLAR$

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक चौका देने वाला एलान किया है पूरी वर्ल्ड सप्राइज है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मडूरो को अमेरिका ने कैप्चर कर लिया यानि पकड लिया है। एक सैन कारवाई के तहत ऐसा किया गया। और इतना ही नहीं उन्हें और उनकी वाइफ को अब वेनेजुएला से बाहर कहीं अमेरिकन्स ले गए हैं। कहां ले गए हैं वो बाद में पता लेगा।

इस घोषणा के कुछ घंटों पहले ही वेनेजुएला की सड़कों पर डर उतर चुका था। लगभग दो बजे रात में वेनेजुएला की राजधानी काराकस में लगातार साथ जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। उसके तुरंद बाद लो एल्टीट्यूड यानि कम उचाई पर उड़ते हुए लडाकू विमान ने पूरे शहर के कई लाखों के उपर चक्कर लगाए। कुछ ही घंटों के भीतर उनके राष्ट्रपती निकोलस मडूरा ने पूरे देश में स्टेट अफ एमरजेंसी घोशित कर दिया। सिचुएशन कितनी गंभीर थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने यूएस पैटरल एवियेशन अड्मिस्टेशन एफ एए ने वेनेजुएलन एयरस्पेस पर सभी अमेरिकन कमर्शियल फ्लाइट्स पर तुरंद रोक लगा दी।

लेकिन अब सवाल यह है कि यूनाइटेट स्टेट्स यानि अमेरिका आखिर वेनेजुएला एक छोटा सा देश है उसमें इतनी गहरी दिल्चस्पी क्यों ले रहा है। अमेरिका की आधिकारिक कहानी काफी समय से एक ही रही है:

ड्रग्स।

अमेरिका का एलिगेशन है कि वेनेजुएला और वेनेजुएला की सरकार नारको ट्राफिकिंग यानि ड्रग्स की सप्लाई और स्मगलिंग में शामिल है। लेकिन क्या यही पूरी सच्चाई है। क्योंकि अमेरिका के अंदर ड्रग्स की क्राइसिस तो है। लेकिन ये ड्रग अलग-अलग जगह से आते हैं और वेनेजुएला उस लंबी सी लिस्ट में महज एक नाम है। तो वेनेजुएला को खास रूप से क्यों टार्गेट किया जा रहा है। और इसी कारण से इस पूरे घटना करम के तथ्यों को और गहराई से जाच करके पर्तों के भीतर जाकर के ये समझना ज़रूरी है कि असल वजह क्या हो सकती है। जिसके कारण दुनिया का सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सबसे शक्तिशाली मिलिटरी और सबसे बड़ा जो देश है इन टर्म्स अफ शक्ती और वज़स वो एक छोटे से देश में इतना जादा इंट्रेस्टेड है। और ये बात महस कुछ प्रेस ब्रीफिंग्स या मीडिया से जाहिर नहीं हो सकते।

तो असली खेल क्या है? असली खेल कुछ और नहीं वही पुराना कारण है:

ओयल यानि पेट्रोलियम।

तो जरा बात करते हैं पेट्रोलियम की। आप सभाविक रूप से सोच रहे होंगे कि अमेरिका को वेनेजुएला के तेल की क्या जरूरत पड़ गई। स्टेटिस्टिक्स के आसपास से जाएं तो आज अमेरिका यूएस दुनिया का सबसे बड़ा ओयल प्रिडूसर है। तेल रेवलूशन के बाद अमेरिका का ओयल प्रड़क्शन बहुत तेजी से बढ़ा है। अब शेल क्या होता है? शेल वो क्रूड ओयल होता है जो शेल रॉक फॉर्मेशन से ड्रिलिंग और हाइड्रॉलिक फ्रैक्चरिंग यानि फ्रैकिंग के जरीये निकाला जाता है।

2008 में अमेरिका 50 लाख बैरल्स पर डे निकालता था। एक बैरल में लगबग 160 लीटर तेल होता है। 2010 के पूरे दशक में अमेरिका फ्रैकिंग यानि शेल से तेल निकालने का जो टेकनोलोजी है उसमें मास्टर करता गया। और 2024-25 तक आते आते अमेरिका का इंटरनल ओयल प्रड़क्शन 5 मिलियन बैरल से बढ़के 13-14 मिलियन बैरल तक पहुँच गया। यानि लगबग 3 गुना हो गया। और आज अमेरिका सऊदी अरेबिया से भी जादा तेल प्रोड्यूस कर रहा है। सऊदी अरेबिया का आंकड़ा लगभग 10-11 मिलियन बैरल्स पर डे है।

और अगर बात करें वेनेजुएला की जो दक्षिणी अमेरिका के कॉंटिनेंट में स्थित है। 2010 के दशक में लगबग 3 मिलियन बैरल्स पर डे तक ही तेल का प्रोडक्शन करता था। तो सवाल ये उठता है कि अगर अमेरिका इतना तेल खुद प्रिडूस कर रहा है। तो फिर वेनेजुएला उसके लिए इतना इंपोर्टेंट क्यों है तेल के मामले में। और इसका जवाब सीधा नहीं है हमें एक परत और खोदनी पड़ेगी।

क्योंकि सारा क्रूड ओयल एक जैसा नहीं होता। तेल सिर्फ नाम का नहीं होता। उसकी डेंसिटी द्वारा पहचाना जाता है। और इसके लिए एक साफ न्यूमेरिकल पैमाना होता है जिसको बोलते है API ग्रैविटी। API ग्रैविटी बताता है कि तेल कितना हलका है या कितना भारी है। जितनी ज्यादा API ग्रैविटी की संख्या होगी तेल उतना ही हलका यानि लाइट होगा। जितना कम API ग्रैविटी तेल उतना ही हेवी।

अब इसे बिलकुल साफ समझिए। सबसे पहले आता है लाइट क्रूड ओयल। इसकी API ग्रैविटी 40 डिग्री से ज्यादा होती है। यानि ये पतला होता है। लगबग जैसे स्मूधी होती है या लस्सी होती है ये वैसा होता है। और इसे रिफाइन करना आसान है सस्ता भी है।

और इसके बाद आता है मीडियम क्रूड ओयल जिसकी API 30 से 40 डिग्री के बीच में होती है। इसके अंत में सबसे नीचे आता है हेवी क्रूड ओयल जिसकी API ग्रैविटी 30 डिग्री से कम होती है। हेवी क्रूड काफी गाड़ा होता है, स्टिकी होता है, इनफाक्ट ये तेजी से बहता भी नहीं है। इसे रिफाइन करना मुश्किल होता है और ऐसा करना

लेकिन एक बात और भी ज़रूरी है, पेट्रोलियम के पूरे साइकल में महज क्रूड ओयल को निकालना ही एक प्रोसेस नहीं है। इसके अलावा बहुत सारे और प्रोसेसेज हैं। और जो सबसे इंपोर्टेंट प्रोसेस आता है वो होता है क्रूड ओयल को रिफाइनरीज में डालना। रिफाइनरीज एक तरह की इंडस्ट्री है जो डिस्टिलेशन का एक प्रोसेस यूज़ करता है। उसकी डीटेल में नहीं जाएंगे लेकिन उस डिस्टिलेशन के प्रॉसेस से वो क्रूड ओयल को कनवर्ट करती है एवियेशन ओयल में, पेट्रोल में, डीजल में, कैरोसीन में और जो हेवी ओयल होता है जिसको शिप्स में यूज़ करते हैं उसमें भी।

रिफाइनरी किसी एक तरह के तेल को ही प्रॉसेस करने के लिए बनी होती है। यानि अगर कोई रिफाइनरी लाइट ओयल को प्रॉसेस करने के लिए बनी है जो स्मूदी जैसा होता है तो वो सिर्फ लाइट ओयल ही प्रॉसेस करेगी। और अगर कोई हेवी ओयल को प्रॉसेस करने के लिए बनी है तो वो लाइट ओयल प्रॉसेस नहीं कर पाएगी। वो सिर्फ हेवी ओयल प्रॉसेस करेगी। अब ये बात आप समझ गया हैं।

तो अब असली बात पर चलते हैं। अमेरिका में जो शेल ओयल निकाला जाता है वो जादधर लाइट क्रूड होता है। यानि उसका जो एपीआई ग्रैविटी है वो 40 से उपर होता है। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका की जादातर रिफाइंरीज लाइट ओयल के लिए बनी ही नहीं थी। क्योंकि जब ये बनी थी तो अमेरिका में शेल ओयल होता ही नहीं था। और ये सारी की साइनरी रिफाइंरीज बनी हैं हेवी क्रूड के लिए। यानि कि वो क्रूड जिसका जो एपीआई ग्रैविटी है वो 30 डिग्री से कम है।

और वहीं से वेनेजुएला की एंट्री होती है। क्योंकि वेनेजुएला ही वो देश है जिसका जादातर जो तेल है वो हेवी क्रूड होता है। अब कहने को तो हेवी क्रूड इस दी वर्स्ट फॉर्म ओप पेट्रोलियम। लेकिन चुकी अमेरिका की सारी की सारी रिफाइंरीज बनी हुई हैं हेवी क्रूड को प्रॉसस करने के लिए। इसलिए अमेरिका के लिए हेवी क्रूड काफी इंपोर्टेंट है।

और इसलिए वेनेजुएला अमेरिका के लिए एक ओयल प्रिडूसर ही नहीं है बल्कि एक स्ट्रेटीजिक नेसेसरी बन चुका है। यानि आज अमेरिका के पास तेल तो बहुत है लेकिन अपनी रिफाइंरीज को चलाने के लिए सही किस्म का तेल नहीं है। और यही वज़ए है कि अमेरिका भले ही ओयल प्रड़क्शन तो रिकॉर्ड रूप में कर रहा है लेकिन आज भी उसे फॉरं क्रूड ओयल इंपोर्ट करना पड़ता है। और ये जो क्रूड ओयल इंपोर्ट होता है ये लगभग सत्तर फीसद हेवी क्रूड ओयल होता है। क्योंकि हेवी क्रूड ओयल अमेरिका में खुद का नहीं होता।

तो सवाल उठता है अब ये कि दुनिया में कौन से ऐसे देश हैं जहांपर हेवी क्रूड मिलता है। और यहीं आपका जवाब आपको मिल जाएगा इस पूरे प्रकरण का। जवाब बहुत सीमित है। दुनिया में तीन बड़े देश हैं जहांपर हेवी क्रूड होता है जिसे अमेरिकन रिफाइनरीज को जरूरत है उस हेवी क्रूड ओयल की। वो तीन देश कौन से हैं?

कैनेडा जो अमेरिका के नौर्थ में है।

वेनेजुएला जिससे अमेरिका का अब संघर्ष चालू हो चुका है।

तीसरा बड़ा नाम है रशा।

अब जरा ओयल रिजर्व्स पर नजर डालते हैं। यानि किसी देश में कितना ओयल अभी उसकी धर्ती के नीचे है जो अभी निकाला नहीं गया है। ओयल रिजर्व्स के बारे में बात करें तो दुनिया का सबसे बड़ा प्रोविन ओयल रिजर्व का देश आपको लगता है कौन होगा? साऊधी अरेबिया, इरान, इराक? नहीं, इन में से कोई नहीं है। इसका सही जबाब है, अब आप गैस कर लेंगे, वेनेजुएला।

दुनिया का सबसे बड़ा ओयल रिजर्व वेनेजुएला में है और सबसे बड़ी बात उस रिजर्व का ज्यादातर हिस्सा हेवी क्रूड है। और ये वही तेल है जिसकी अमेरिकन रिफाइनरीज को आज भी जरूरत है। लेकिन पिछले कुछ सालों में वेनेजुएला से यूएस ओयल इंपोर्ट्स लगबग खत्म हो चुके हैं क्योंकि इन दोनों देशों के बीच पॉलिटिकल टेंशन बढ़ता जा रहा है।

आज अमेरिका की करीब 61% ओयल इंपोर्ट्स सिर्फ एक देश चाते हैं और वो है कैनेडा। कैनेडा के साथ भी अमेरिका की जो संबंद हैं वो डॉनल्ड ट्रम्प के प्रेसिडन्ट बनने के बाद से थोड़े खटे होते गया हैं। लेकिन कैनेडा से दो तिहाई के लगभग तेल इंपोर्ट करते करते वेनेजुएला से आने वाला इंपोर्ट लगभग शूनने हो चुका है।

और यहीं से वेनेजुएला एक देश नहीं बलकि एक जियो पॉलिटिकल चेस बोर्ड बन जाता है जिसका एकनोमिक इंपाक्ट बहुत बड़े हैं। क्योंकि अगर वेनेजुएला की में रेजीम चेंज होता है यानि वेनेजुएला के राश्टपती हटा करके अमेरिकन फ्रेंडली कोई सरकार आती है तो वेनेजुएला से सांक्शन्स तो हटेंगे ही लेकिन साथ ही साथ दुनिया का सबसे बड़ा हेवी क्रूड रिजर्व अमेरिकन एनरजी सिस्टम को पावर देने के लिए फिर से एकसेसबल हो जाएगा।

और यही वज़ए है कि कहानी शायद सिर्फ ड्रग्स तक ही सीमित नहीं है। ये कहानी है अमेरिका की एनरजी सिक्योरिटी की, उसकी रिफाइंरी की एकनॉमिक्स की और उनकी रिफाइंरी की हेवी क्रूड की भूक की। और अफकौर्स जियो पॉलिटिक्स की।

वेनेजुएला और अमेरिका के बीच में जो संगर्श है वो एकदम से चरम पे पहुँँच गया है। किसी एक देश के राश्ट्रपती को इस तरीके से गिरफ्तार करके कहीं ले जाना इस एक मेजर इंटरनाशनल इंसिडेंट जिसका शायद कोई इंटरनाशनल एकजांपल हिस्ट्री में नहीं है। इस पूरी घटना का अंत कहां होगा ये अभी कहना मुश्किल है। लेकिन ये तो तै है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे बहुत सारे एकनॉमिक औरपॉलिटिकल डिमेंशन है। जुड़े रहिएगा जैसे जैसे ये स्टोरी डेवलप होगी हम आपको इसके वो तत्य बताएंगे जो शायद आपको रेगिलर मीडिया में नहीं मिलेंगे.

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