Prarabdh kya hai? अर्थ: ‘प्रारब्ध’ का अर्थ है वह भाग्य या नियति जो हमारे पिछले जन्मों के अच्छे-बुरे कर्मों (संचित कर्मों) का परिणाम है और जो इस जन्म में हमें भोगना ही है।
स्रोत: यह ‘संचित कर्म’ (अनेक जन्मों के कर्मों का कुल संग्रह) का वह अंश है जो वर्तमान जीवन के लिए ‘पक’ (ripe) चुका है।

‘प्रारब्ध’ का अर्थ है वह भाग्य या नियति जो हमारे पिछले जन्मों के अच्छे-बुरे कर्मों (संचित कर्मों) का परिणाम है और जो इस जन्म में हमें भोगना ही है।

प्रारब्ध क्या है? Prarabdh kya hai?
स्वरूप: यह हमारे जन्म, परिवार, शरीर और जीवन की मुख्य घटनाओं (जैसे अमीर-गरीब होना) को निर्धारित करता है, जिसे बदला नहीं जा सकता, सिर्फ भुगता जा सकता है।
यह कैसे काम करता है?
संचित कर्म (Accumulated Karma): हर जन्म में हम जो भी कर्म करते हैं (शरीर, वाणी, मन से), वे ‘संचित’ होते जाते हैं। यह एक बड़ा बैंक खाता है।
प्रारब्ध कर्म (Fructifying Karma): इस संचित खाते से कुछ हिस्सा वर्तमान जीवन में फल देने के लिए अलग हो जाता है, जिसे ‘प्रारब्ध’ कहते हैं। यह वही है जो हमें इस जन्म में मिलता है।
क्रियमाण कर्म (Current Karma): वर्तमान जीवन में हम जो नए कर्म करते हैं (अच्छे या बुरे), वे ‘क्रियमाण’ कहलाते हैं। ये फिर से संचित कर्मों के खाते में जमा होते जाते हैं।
भाग्य का निर्धारण: प्रारब्ध ही हमारे जीवन का ‘भाग्य’ या ‘किस्मत’ तय करता है, जो हमारे पिछले कर्मों का फल है।
