Bajaj Housing Finance Shares: आज क्यों सुर्खियों में हैं शेयर, निवेशकों के पोर्टफोलियो पर क्या होगा असर?

Bajaj Housing Finance के शेयर मंगलवार सुबह से ही मार्केट में चर्चा का विषय बने हुए हैं। मार्केट खुलने से पहले ही यह Google Trends पर शीर्ष खोजों में शामिल था। इसकी वजह कंपनी से जुड़ी एक बड़ी कॉर्पोरेट कार्रवाई है, जिसे निवेशक खासा ध्यान दे रहे हैं।


शेयरों में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?

कंपनी में प्रोमोटर ग्रुप द्वारा हिस्सेदारी की बिक्री की जानकारी सामने आने के बाद Bajaj Housing Finance के शेयरों में लगभग 9% की गिरावट देखने को मिली। ब्लॉक डील के जरिए प्रोमोटर्स की ओर से एक हिस्सा ऑफलोड किए जाने से निवेशकों की भावनाओं पर दबाव दिखा।


1,580 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील — डिटेल जानिए

NDTV Profit की ब्‍लूमबर्ग के हवाले से दी गई रिपोर्ट के अनुसार:

  • कंपनी ने बजाज फाइनेंस लिमिटेड में अपनी 2% हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है।
  • यह बिक्री ब्लॉक डील के माध्यम से की जाएगी।
  • ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस 95 रुपये प्रति शेयर रखा गया है, जो पिछली क्लोजिंग से लगभग 9.6% कम है।
  • कुल डील की वैल्यू 1,580 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

कंपनी ने एक्सचेंज को जानकारी देते हुए कहा है कि कुल इक्विटी में से अधिकतम 2% या 16,66,00,000 शेयर बेचे जाएंगे।


कंपनी में प्रोमोटर्स की हिस्सेदारी कितनी है?

फिलहाल कंपनी में प्रोमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी लगभग 88.7% है। SEBI के नियमों के अनुसार कंपनियों को निश्चित समय सीमा में अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग तय स्तर तक लानी होती है, जिसकी वजह से इस तरह की हिस्सेदारी बिक्री सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।


SEBI के MPS नियमों की क्या भूमिका है?

SEBI के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कम से कम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Public Float) बनाए रखना अनिवार्य है।

  • जिन कंपनियों का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ के बीच है, उन्हें यह शर्त पूरा करने के लिए 5 साल दिए जाते हैं।
  • वहीं, जिन कंपनियों का मार्केट कैप इससे अधिक है, उनके पास 10 साल का समय होता है।

Bajaj Housing Finance में उच्च प्रमोटर होल्डिंग होने के कारण कंपनी को समय-समय पर हिस्सेदारी घटानी पड़ सकती है ताकि नियामकीय शर्तें पूरी की जा सकें।


आपके पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ेगा?

  • अल्पावधि में शेयर कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
  • प्रमोटर हिस्सेदारी की बिक्री अक्सर निवेशकों में सावधानी का भाव पैदा करती है।
  • लेकिन दीर्घकाल में यह कदम SEBI की गाइडलाइंस के अनुरूप होने से कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है।
  • निवेशकों को जल्दबाज़ी में निर्णय लेने से बचने और कंपनी की आगे की घोषणाओं पर ध्यान रखने की सलाह दी जाती

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