Pradhan mantri internship scheme (PMIS): क्या है, क्या काम कर रहा है, क्या नहीं — और इससे युवा क्या सीखते हैं


Pradhan mantri internship scheme (PMIS) भारत में युवा बेरोज़गारी, कौशल अंतर और उद्योग-शिक्षा की खाई को पाटने के लिए सरकार नई पहल कर रही है। ऐसी ही एक महत्वाकांक्षी पहल है प्रधान मंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme / PMIS) — जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को बड़ी कंपनियों में प्रायोगिक अनुभव, कौशल प्रशिक्षण और उद्योग-संबंधी ज्ञान देना है। �

🧭 प्रधान मंत्री इंटर्नशिप योजना — एक परिचय
प्रधान मंत्री इंटर्नशिप योजना अक्टूबर 2024 से एक पायलट परियोजना के तौर पर शुरू हुई। इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 10 मिलियन युवाओं को देश की 500 शीर्ष कंपनियों में एक-साल की इंटर्नशिप प्रदान करना है। इस योजना के ज़रिये युवाओं को सिर्फ रोज़गार नहीं, बल्कि वास्तविक कार्य अनुभव और उद्योग की मांग अनुरूप कौशल सीखने का अवसर दिया जा रहा है। �

📌 योजना के मुख्य उद्देश्य
उद्योग-संबंधी कौशल का विकास:
इंटर्नशिप के ज़रिये युवाओं को तकनीकी और व्यवहारिक कौशल प्राप्त होंगे जो उन्हें भविष्य में बेहतर रोज़गार के लिये तैयार करेंगे। �

आधुनिक कार्य संस्कृति का अनुभव:
युवा वास्तविक कार्यस्थल की कार्यप्रणाली, टीम वर्क, परियोजना प्रबंधन और समय-सीमा में काम करना सीखते हैं। �

नैटवर्किंग और प्रेरणा:
कंपनियों के विशेषज्ञों से सीखने और संपर्क बनाने का अवसर मिलता है जो आगे करियर में मदद कर सकता है। �



💡 क्या काम कर रहा है? (Positives)


✔️ 1. वास्तविक दुनिया का अनुभव
कई प्रतिभागियों ने अनुभव साझा किया है कि इस योजना के कारण उन्होंने वास्तविक उद्योग परियोजनाओं पर काम किया, न कि केवल सैद्धांतिक अध्ययन। उदाहरण के लिये, एक इंजीनियरिंग छात्र ने क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा-इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों पर काम किया, जो कॉलेज में संभव नहीं था। �

✔️ 2. कौशल और आत्मविश्वास में वृद्धि
इंटर्नशिप के दौरान युवा न केवल तकनीकी कौशल सीखते हैं, बल्कि सॉफ्ट स्किल्स, जैसे संवाद कला, समस्या-समाधान, टीम वर्क और स्वयं-प्रेरणा में भी विकास करते हैं। इन अनुभवों से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है। �

✔️ 3. कुछ को आगे रोज़गार के अवसर मिले
कुछ इंटर्न्स को उनके नेटवर्क के आधार पर दूसरी कंपनियों या स्टार्टअप्स द्वारा आउटरीच किया गया — जिससे उनके करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं। �


✔️ 4. इंडस्ट्री और सरकार का समन्वय
किसी हद तक कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय (MCA) द्वारा कंपनियों और इंटर्न्स दोनों के लिये संसाधन, मार्गदर्शन और सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। �

क्या काम नहीं कर रहा है? (Challenges)


🚫 1. कम स्टाइपेंड और आर्थिक चुनौती
योजनाअ के तहत इंटर्न्स को ₹5,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है — जिसमें ₹4,500 सरकारी सहायता और ₹500 कंपनी की CSR से आते हैं। इस राशि से बड़ी शहरों में रहने-खाने और आवागमन की लागत भी मुश्किल से ही निकलती है, जिससे कई प्रतिभागी आर्थिक रूप से संघर्ष करते हैं। �

🚫 2. पोस्ट-इंटर्नशिप नौकरी का स्पष्ट मार्ग नहीं
अधिकांश इंटर्न के पास यह स्पष्ट नहीं होता कि एक बार इंटर्नशिप समाप्त होने पर क्या अवसर उपलब्ध होंगे। इससे माता-पिता और छात्रों के मन में संदेह पैदा होता है। �

🚫 3. भागीदारी और स्वीकार्यता कम
पहले चरण में कंपनियों ने लगभग 82,000 प्रस्ताव दिए, लेकिन केवल 8,700 इंटर्न ने शामिल होकर प्रशिक्षण शुरू किया, जो इस योजना की स्वीकार्यता और ज़मीन पर उपयोग क्षमता की कमी को दर्शाता है। �

🚫 4. योजना का प्रभाव सीमित
सरकार द्वारा बजट में बड़ी राशि (दस हजार करोड़ रूपये से अधिक) आवंटित होने के बावजूद योजनाओं में फंड उपयोग दर कम है और कई हिस्सों में इसे बेहतर क्रियान्वयन की ज़रूरत है। �

🚫 5. समावेशन और पहुँच में चुनौतियाँ
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर ग्रुप, छोटे शहरों के युवक, और ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा योजना तक पहुंच नहीं पा रहे हैं। इसकी वजह आर्थिक बोझ, रहने-खाने के खर्च, और सूचना की कमी है। �

🧑‍🎓 युवाओं से अनुभव: सीख vs चुनौतियाँ
इंटर्न Padwalkar जैसे कई युवा जिन्होंने अपना लैपटॉप तक नहीं था, प्रशिक्षण के बाद तकनीकी उपकरणों और संसाधनों तक पहुँचे। उन्होंने महसूस किया कि कार्यस्थल में सीखने का अनुभव कितनी जल्दी उन्हें बदल सकता है। �

वहीं Akriti Saxena जैसे इंटर्न को संरचित मार्गदर्शन की कमी महसूस हुई — जहाँ कोई व्यक्तिगत ट्यूटर या मेन्टर नहीं होता, वहां कुछ युवाओं को कॉर्पोरेट सिस्टम से जुड़ने में कठिनाई होती है। �

🏛️ सरकारी प्रतिक्रिया और सुधार की दिशा
संसदीय वित्त समिति ने सुझाव दिया है कि योजना के प्रभाव और पारदर्शिता को मापने के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन, लिविंग खर्च के लिये अधिक सहायता, और इंटर्नशिप-से-नौकरी तक की स्पष्ट योजना ज़रूरी है। इससे अधिक विविध प्रतिभा शामिल हो सकेगी। �

📊 भविष्य की संभावनाएँ
यद्यपि योजना अभी प्रारंभिक चरण में है और चुनौतियों का सामना कर रही है, इसके सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट हैं। यदि:
✅ स्टाइपेंड बढ़ाया जाए,
✅ रोजगार के सूत्र स्पष्ट किये जाएँ,
✅ और छोटे, मझोले उद्यमों को भी शामिल किया जाए,
तो यह योजना भविष्य में लाखों युवाओं का करियर बदलने वाला अवसर बन सकती है।


📝 निष्कर्ष


प्रधान मंत्री इंटर्नशिप योजना एक महत्वाकांक्षी और युवा-केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं को औद्योगिक कौशल, व्यावसायिक अनुभव और करियर के नए अवसर देना है। हालांकि प्रारंभिक अनुभव सकारात्मक हैं, लेकिन स्टाइपेंड, समावेशन और करियर मार्गदर्शन जैसी चुनौतियों से योजना की सफलता पर असर पड़ रहा है। अगर इन बाधाओं को दूर किया जाए तो यह योजना भारत के युवाओं के लिये एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

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