सुप्रीम कोर्ट ने कहा 100 मीटर से कम के पहाड़ काटो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा 100 मीटर से कम के पहाड़ काटो हरियाणा से राजस्थान की जो रेंज है, इनको अरावली रेंज कहा जाता है। अरावली पहाडियां हिमाल्या से 3.2 बिलियन साल पुरानी है और इन पहाडियों को पूरे एशिया के अंदर नैचुरल प्रोटेक्टर यानी प्रकर्ती की एक शील्ड कहा जाता है, जो भारत को मिली हुई है। क्योंकि अरावली पहाडियां थार डेजर्ट से उड़ने वाली धूल को और थार डेजर्ट को आगे बढ़ने से रोकती है ताकि दिल्ली और यूपी में रहने वाले लोग सांस ले सकें, जी सकें। वरना ये ठंड़ा रेगिस्तान बन गया होता।



बट आप सुनके शौक हो जाओगे कि सुप्रीम कोट ने इन अरावली पहाडियों को खतम करने की एक नई परिभाशा दी है। सुप्रीम कोट ने ये कह दिया है कि 100 मीटर से उपर की पहाडियों को ही अरावली माना जाएगा और बाकि बची जितनी भी पहाडियां हैं, वो सब माइनिंग माफियाओं को सुप्रीम कोट ने गिफ्ट में दे दी है।

आप जानके हैरान होगे कि इस पूरी अरावली रेंज में 8.7 प्रतिशत पहाडियां ही 100 मीटर से उपर हैं, मतलब 93 प्रतिशत पहाडियां 100 मीटर से नीचे हैं। इन पूरी पहाडियों में:






1000 से जादा एनिमल स्पीशीज,



350 से जादा बर्ड स्पीशीज रहती हैं।

1999 से 2010 के बीच गुडगाउं और फरीदाबाद में जब वाटर क्राइसिस आया था, तब 60-80 प्रतिशत पानी गुडगाउं शहर को अरावली हिल्स ने दिया था। उससे पहले 1985 और 1995 के बीच अलवर में 5 नदियां सूख गई थी। तब अरावली के स्लोप पर कुंड और चेक डेंस बनाये गए थे। वहां के पानी की वज़े से 1000 गाउं सूखे पढ़ने से बच गये थे।

और सुप्रीम कोड ने जो ये ओर्डर दिया है, आपको पता है ये प्रस्ताव किसने दिया है सुप्रीम कोड को? खुद एंवायर्मेंट मिनिस्ट्री ने, मतलब गवर्मेंट ने। इससे पहले कॉंगरेस भी और अभी बीजेपी भी और सुप्रीम कोड को भी कोई फरक नहीं पड़ता कि लोग ठीक से सांस ले पा रहे हैं या नहीं ले पा रहे हैं। हमें अपने बिजनिस्स से मतलब है.

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